
अंब (ऊना)। टकारला में पेश आए सड़क हादसे में मासूम अर्शप्रीत की मौत ने क्षेत्र के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। लोगों का आरोप है कि यह हादसा स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से हुआ है। विभाग भी इसके लिए दोषी है। निजी स्कूलों में सत्र शुरू होने से पहले विभाग के अधिकारियों ने क्यों नहीं जांच की? स्कूल परिसर से लेकर बच्चों को लाने-ले जाने पर कैसी गाड़ियां हैं, उनमें अटेंडेंट हैं या नहीं, इसकी जांच पहले क्यों नहीं की गई? महज कुछ पैसों की खातिर विभाग के अधिकारी खानापूर्ति कर सत्र चलाने की अनुमति दे देते हैं।
अभिभावकों में राजेंद्र राणा, महेश कुमार, दिलीप चौधरी, विक्रम सिंह, सोहन कुमार, राजेश्वर सिंह, रामपाल चौधरी का कहना है कि उपायुक्त को ऐसे मामले में स्वयं हस्तक्षेप कर स्कूल की कार्यप्रणाली तथा स्कूल की ओर से दी जा रही सुविधाओं के बारे में छानबीन करनी चाहिए। उधर, बच्चे के परिजनों का कहना है कि अर्शप्रीत स्कूल जाने को लेकर जितना खुश था। उतना ही बड़ा सदमा स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उन्हें पहुंचा है। बच्चे के पिता सुखचैन सिंह, मामा संजीव चौधरी के साथ उनके सभी घर वालों ने उपायुक्त से मांग की है कि ऐसे लापरवाह प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई लाए। जिससे अभिभावक बेझिझक अपने बच्चों को स्कूल भेज सकें। उधर डीएसपी अंब सागर चंद्र का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
